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रिश्तों का कत्ल: मानसिक रोगी पिता की जमीन पर अपनों की गिद्ध दृष्टि, रजिस्ट्री दफ्तर में खूनी खेल!

बस्ती में जंगलराज: जमीन के लिए मां-पत्नी को सरेराह पीटा, मंगलसूत्र लूटा; कानून के घर में गुंडई!

अजीत मिश्रा (खोजी)

सरेराह कानून की धज्जियां: बस्ती रजिस्ट्री दफ्तर बना गुंडई का अखाड़ा, मानसिक रोगी पिता की जमीन पर अपनों की ‘गिद्ध दृष्टि’!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • शर्मनाक: पागल पिता की लाचारी का फायदा उठाना चाहते थे भू-माफिया, विरोध पर बेटे को मरणासन्न किया!
  • रजिस्ट्री दफ्तर या अखाड़ा? बस्ती में रजिस्ट्री के नाम पर सरेआम मारपीट, कहाँ है पुलिस का खौफ?
  • साहब! दफ्तर में गुंडे घूम रहे हैं: जबरन जमीन हड़पने की कोशिश, विरोध करने पर परिवार को लहूलुहान कर लूटा!

बस्ती। सरकारी दफ्तरों की चौखट अब न्याय की नहीं, बल्कि दबंगई और साजिशों की गवाह बनती जा रही हैं। ताज़ा मामला बस्ती जनपद के कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहाँ रिश्तों का कत्ल कर जमीन के एक टुकड़े के लिए अपनों ने ही सारी मर्यादाएं तार-तार कर दीं। मानसिक रूप से अस्वस्थ एक पिता की लाचारी का फायदा उठाकर उसकी जमीन हड़पने का जो घृणित खेल रजिस्ट्री कार्यालय में खेला गया, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

साजिश, सियापा और सरेआम गुंडई

मामला समरधीर गांव का है, जहाँ धर्मेन्द्र पाण्डेय उर्फ पुट्टू बाबा के मुताबिक, भू-माफियाओं और लालची तत्वों ने उनके मानसिक रोगी पिता को मोहरा बनाया। 14 मई को साजिश के तहत पिता को जबरन रजिस्ट्री कार्यालय लाया गया ताकि बेशकीमती जमीन नाम कराई जा सके। लेकिन जब बेटे और परिवार को इस जालसाजी की भनक लगी, तो रजिस्ट्री दफ्तर “कुरुक्षेत्र” में तब्दील हो गया।

“क्या प्रशासन सो रहा है? रजिस्ट्री कार्यालय जैसी सुरक्षित जगह पर सरेआम मारपीट होना कानून-व्यवस्था पर करारा तमाचा है।”

महिलाओं से अभद्रता और लूट की वारदात

पीड़ित धर्मेन्द्र पाण्डेय का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मां के साथ मिलकर इस अवैध रजिस्ट्री का विरोध किया, तो आरोपियों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। बीच बचाव करने आई धर्मेन्द्र की पत्नी बबली पाण्डेय के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि सौभाग्य के प्रतीक ‘मंगलसूत्र’ पर भी हमलावरों ने हाथ साफ कर दिया।

घटना के मुख्य बिंदु:

  • मानसिक बीमारी का फायदा: अस्वस्थ पिता को मोहरा बनाकर जमीन हड़पने की कोशिश।
  • दबंगई का तांडव: विरोध करने पर पूरे परिवार को लहूलुहान किया गया।
  • लूट और धमकी: पीड़ित का मोबाइल छीना गया और जान से मारने की धमकी देकर आरोपी फरार।
  • वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो पुलिस की मुस्तैदी और कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है।

पुलिस की चुप्पी या जांच की सुस्ती?

मारपीट के दौरान धर्मेन्द्र पाण्डेय बेहोश होकर गिर पड़े, लेकिन आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे सरेआम लूटपाट कर निकल गए। हालांकि, कोतवाली पुलिस का रटा-रटाया जवाब है कि “जांच की जा रही है”, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या एक मानसिक रोगी की सुरक्षा और एक परिवार के सम्मान की कीमत सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है?

बस्ती की जनता पूछ रही है— क्या अब रजिस्ट्री दफ्तरों में जमीन के साथ-साथ इंसानियत की भी नीलामी होगी? दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी या सफेदपोशों के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

बस्ती पुलिस को अब ‘जांच’ से आगे बढ़कर ‘एक्शन’ दिखाना होगा, वरना रक्षक और भक्षक के बीच का अंतर मिटते देर नहीं लगेगी।

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